मंगलवार, 31 अगस्त 2010

काला सफ़ेद

देखा कि बाहर से झाँकते हुए
लम्बी कार के काले शीशों के
पीछे की दुनिया
कितनी सफ़ेद है।

लम्बाई की आड़ में
पहुँचने वाले काले गट्टों ने
सफ़ेद साये से पूछा,
दिखने के इस अंदाज को
सीखने से
क्यों हरवाना चाहता है।

सीखने ने दिखने से
नजर मिलाने को
इन्कार कर दिया और बोला,
देख, देख के बहुत सीख लिया
अब सीख, सीख के देख।

सफ़ेद शीशों के पीछे की
काली दुनिया को सीख
सफ़ेद गट्टों को काले साये
पहचान आने लगे।

- नीरज मठपाल
अगस्त ३१, २०१०

रविवार, 29 अगस्त 2010

फफूँदी

घर के किसी कोने में
दरी पर यूँ ही पड़ी
एक प्लेट ने उससे पूछा,
मैं तीन महीनों से उल्टी गिरी हूँ
फफूँदी का मैं अब घर बन चुकी हूँ
मुझे कब स्वच्छ पानी का
अमृत प्राप्त होगा?

फफूँदी हँसने लगी।

उसने चेहरे को प्लेट से
और दूर ले जाकर बुदबुदाया,
तू अकेली तो नहीं
सारे घर में सीलन है
उसी का पानी निचोड़
सब फफूँदी बन रहा है,
तू भी बन।

देखें पंचतत्त्व और ठोस पदार्थ में
भंगुरता किसे पहले दिखती है।
उसके मालिक ने कहा
घर को आग लगा दो !

लग गई आग।

इधर फफूँदी दूर किसी घर में
फिर हँस रही थी।

- नीरज मठपाल
अगस्त २९, २०१०

सोमवार, 26 जुलाई 2010

Points at Deep Might

On a sunny day
lying in sand of a beach
How long you've been here dear Ocean, I asked
The great sea played
many vocals in a breath taking moment
but it's my limitation to not hear the most beautiful chord

Slowly I walked into the blue water
letting the moss play with my feet
It feels like a tiny point
lost in a limitless ocean
with hands in hands
looking at another tiny point

- Neeraj Mathpal
July 26, 2010

मंगलवार, 25 मई 2010

भट भट भट भट्टाम

ए बड़ी सी मेज
महोगनी की
विशाल घिसी हुई भुजा सी।
तेरा अंत निकट है
आगे के पाए उखाँडू पहले
या पीछे के
या दे मारूं
एक बड़ा हथौड़ा बीच में।
अजीब समस्या
प्राण हर लेने में भी
सोचना
कि आरम्भ कैसे हो।
सामान्य सी दर्शित होती मेज की
मौत ऐसी जटिल।
तो क्यों
जटिल मनुष्य को मिलती
इतनी सामान्य मौत।
बस कुछ ही आवाजें
ठांय ठांय ठांय और
भट भट भट भट्टाम।

- नीरज मठपाल
मई २५, २०१०