ब्रह्म का छद्म
या छद्म ब्रह्म का
अनंत आकाश का छोर
या भ्रम आकाश के होने का
शून्य में विलीन होने का गणित
या बीज जन्म कि माया का
सब कुछ अघोषित, सुपोषित,
निर्देशित
किन्तु
अपलक, अघटित
विलीनता
तन्मय सन्नाटे में।
- नीरज मठपाल
अप्रैल १२, २००३
शनिवार, 21 अप्रैल 2007
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